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Health Care Tips in Hindi – स्वस्थ रहने की अच्छी आदतें

Health Care

Health Care Tips in Hindi – स्वस्थ रहने की अच्छी आदतें

आज हम बहुत सी बिमारी से परेशान है । हर एक को बिमारी होती ही है । आज हम health tips बता रहे है ।सबसे पहले कुछ बातो का ध्यान रखना जरूरी है ।

कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

घर में सफाई पर खास ध्यान दें, विशेषकर रसोई तथा शौचालयों पर। पानी को कहीं भी इकट्ठा न होने दें। सिंक, वॉश बेसिन आदि जैसी जगहों पर नियमित रूप से सफाई करें तथा फिनाइल, फ्लोर क्लीनर आदि का उपयोग करती रहें। खाने की किसी भी वस्तु को खुला न छोड़ें। कच्चे और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें। खाना पकाने तथा खाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों, फ्रिज, ओवन आदि को भी साफ रखें। कभी भी गीले बर्तनों को रैक में नहीं रखें, न ही बिना सूखे डिब्बों आदि के ढक्कन लगाकर रखें।

ताजी सब्जियों-फलों का प्रयोग करें। उपयोग में आने वाले मसाले, अनाजों तथा अन्य सामग्री का भंडारण भी सही तरीके से करें तथा एक्सपायरी डेट वाली वस्तुओं पर तारीख देखने का ध्यान रखें।

-बहुत ज्यादा तेल, मसालों से बने, बैक्ड तथा गरिष्ठ भोजन का उपयोग न करें। खाने को सही तापमान पर पकाएं और ज्यादा पकाकर सब्जियों आदि के पौष्टिक तत्व नष्ट न करें। साथ ही ओवन का प्रयोग करते समय तापमान का खास ध्यान रखें। भोज्य पदार्थों को हमेशा ढंककर रखें और ताजा भोजन खाएं।

– खाने में सलाद, दही, दूध, दलिया, हरी सब्जियों, साबुत दाल- अनाज आदि का प्रयोग अवश्य करें। कोशिश करें कि आपकी प्लेट में ‘वैरायटी ऑफ फूड’ शामिल हो। खाना पकाने तथा पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करें। सब्जियों तथा फलों को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं।

नमक वाला पानी पीये – नियमित रूप से सुबह पानी में काला नमक मिलाकर पीना शुरू करे इसे पीने से ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, एनर्जी में सुधार, मोटापा और अन्य तरह की बीमारियां तुरंत ठीक हो जाती है। लेकिन नमक पानी लेते समय इस बात का ध्यान रखें कि इसमें आपको सादे नमक का प्रयोग नहीं करना है, अथवा यह फायदे की जगह आपको नुकसान पहुचायेगा। काले नमक में 80 मिनरल और जीवन के लिए जरूरी सभी आवश्यक प्राकृतिक
तत्व पाए

नए निष्कर्षो में यह बात पता चली है कि एक-दो कप कॉफी पीने वालों में कॉफी का सेवन न करने वालों की तुलना में हृदय संबंधी समस्याओं से मरने की संभावना 20 प्रतिशत कम होती है। इसे हम दूसरे शब्दों में कहें तो कॉफी हृदयघात के बाद हृदय को अच्छा करने में मददगार है, और यह दोबारा हृदयघात की संभावना को भी कम करता है।इस का ज्यादा इस्तेमाल से नुकसान भी  हो सकता है ।

पाचन के लिए बेहतर: अदरक का जूस विभिन्न तरह के पाचन संबंधी समस्याओं में आराम दिलाता है। यह पाचन प्रकिया में एक सक्रियतत्व के तौर पर काम करता है।

खांसी-पुरानी खाँसी होने पर 40 ग्राम मुलैठी, 10 ग्राम पीपल और 100 ग्राम शुद्ध शहद का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए। एक बार में 5 ग्राम पिएँ।

नींबू और शहद- ये है एक ज़बरदस्त नुस्ख़ा वज़न कम करने के लिए. अगर आप अपना वज़न कम करना चाहते हैं तो बस एक ग्लास गर्म पानी में 1 नींबू का रस और 2 चम्मच शहद मिलाकर पिएं और मोटापे को कम करें.

गैस व् बदहजमी दूर करने के लिए -. भोजन हमेशा समय पर करें.
-प्रतिदिन सुबह देसी शहद में निम्बू रस मिलाकर चाट लें.

– भोजन के समय सादे पानी के बजाये अजवायन का उबला
पानी प्रयोग  करे

-लौंग का उबला पानी रोजाना पियें.

-जीरा, सौंफ, अजवायन इनको सुखाकर पावडर बना लें,शहद के साथ भोजन से पहले प्रयोग करें.

सर दर्द से राहत के लिए –  तेज़ पत्ती की काली चाय में निम्बू का रस निचोड़ कर
पीने से सर दर्द में अत्यधिक लाभ होता है.

– सफ़ेद चन्दन पावडर को चावल धुले पानी में घिसकर उसका
लेप लगाने से भी फायेदा होगा.

– सफ़ेद सूती का कपडा पानी में भिगोकर माथे पर रखने से
भी आराम मिलता है.

-लहसुन पानी में पीसकर उसका लेप भी सर दर्द में
आरामदायक होता है.
-.सफ़ेद सूती कपडे को सिरके में भिगोकर माथे पर रखने से भी
दर्द में राहत मिलेगी.

बालों की रूसी दूर करने के लिए
– नारियल के तेल में निम्बू का रस पकाकर रोजाना सर की
मालिश करें.
– पानी में भीगी मूंग को पीसकर नहाते समय शेम्पू की जगह
प्रयोग करें.

तांबे के
बर्तन का पानी पीयें
तांबे के बैक्टीरिया-नाशक गुणों में
मेडिकल साईंस बड़ी गहरी रुचि ले
रहा है। तांबा अपने एंटी-बैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटी
इंफ्लेमेट्री गुणों के लिए भी जाना जाता है। यह शरीर
के आंतरिक व बाह्य घावों को जल्दी भरने के लिए
काफी फायदेमंद साबित होता है।दिल को स्वस्थ बनाए रखकर ब्लड प्रेशर को
नियंत्रित कर यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है।
इसके अलावा यह हार्ट अटैक के खतरे को भी कम
करता है। यह वात, पित्त और कफ की शिकायत
को दूर करने में मदद करता है।

सर्दी मे -बादाम,काजू , पिस्ता, किशमिश, अखरोट, मूंगफली ये सब
पोषक तत्वों से भरपूर हैं । विटामिन, खनिज लवण एवं एंटी
ऑक्सीडेंट तत्वों का भंडार हैं, इनका सर्दी के मौसम में सेवन
करना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है साथ ही दूध, दही,
छाछ का नियमित सेवन शरीर के लिए अत्यंत लाभदायक
होता है, शीत ऋतु में मक्का ,बाजरे की रोटी  घी, मक्खन, गुड
के साथ सेवन करना स्वादिष्ट एवं गुणकारी होता है

मोटापा -एक ग्लास थोड़ा गरम प
काली मिर्च पाउडर, और चार चम्मच नींबू पानी,
तथा एक चम्मच शहद मिला कर नित्य हर रोज सुबह
पीने से वजन कम होता है।
और अगर खाली पेट सुबह में गरम पानी में नींबू नि
कर उसमे एक चम्मच शहद मिला कर रोज पिये तो भी
वजन कम होता है।
लाभदायी होते है। कच्चे सैलड में गोभी के पत्ते उबाल
कर, या फिर कच्चे खाने से वजन कम होता है।

लंबा होने के लिए -रस्सी कूदना न सिर्फ वजन को नियंत्रित करता हैं। बल्कि
हाइट को बढ़ाने हेतु भी बहुत उपयोगी व्यायाम माना जाता
है। पाँव,कमर तथा पीठ की मांसपेशियाँ मजबूत बनती हैं। मेरुदंड
में खिचाव होता है जिससे लम्बाई बढ़ने में सहायता मिलती
है।असगंध: असगंध पाउडर 5 ग्राम को बराबर मात्रा में
खांड मिलाकर सुबह शाम दूध के साथ लेते हैं या असगंध
क्षीरपाक विधि जिसमे 250 ग्राम दूध एवं 250 ग्राम
पानी लेकर उसमे 5 –10 ग्राम असगंध पाउडर डालकर
पकाते हैं। पानी जल जाने एवं दूध के शेष रहने पर मीठा
मिलाकर पी लेते हैं।

जुकाम होने पर पानी, सूप आदि के रूप में पर्याप्त
पदार्थ लेते रहें।
अदरक का एक छोटा टुकड़ा पा
चुटकी भर नमक डालकर गरारे करने से गले के दर्द, बन्द
नाक, गले की खराश में तुरन्त आराम आता है।
तुलसी, अदरक, कालीमिर्च एवं लोंग की
,जुकाम, सर्दी खाँसी में बहुत फायदेमंद है।
तुलसी और अदरक का थोड़ा रस निकालकर ग
गुनगुना रहने पर थोड़ा शहद मिलाकर लेना फायदेमंद है।
एक गिलास गरम
पावडर डालकर पीने से खाँसी, जुकाम में आराम
मिलता है।


गर्मी में जब भी घर  से निकले ,कुछ खा कर और पानी
पी कर ही निकले ,खाली पेट नहीं
गर्मी में ज्यादा भारी (garistha),बासा भोजन नहीं
करे,क्योंकि गर्मी में सरीर की जठराग्नि मंद रहती है
,इसलिए वह भारी खाना पूरी तरह पचा नहीं पाती
और जरुरत से ज्यादा खाने या भारी खाना खाने से
उलटी-दस्त की शिकायत हो सकती है
गर्मी में सूती और हलके रंग के कपडे पहनने चाहिये
चेहरा और सर रुमाल या साफी से ढक कर निकलना
चाहिये
प्याज का सेवन तथा जेब में प्याज रखना चाहिये
बाजारू ठंडी चीजे नहीं बल्कि घर की बनी ठंडी
चीजो का सेवन करना चाहिये
ठंडा मतलब आम(केरी) का पना, खस,चन्दन गुलाब
फालसा संतरा का सरबत ,ठंडाई सत्तू, दही की
लस्सी,मट्ठा,गुलकंद का सेवन करना चाहिये
इनके अलावा लोकी ,ककड़ी ,खीरा,
तोरे,पालक,पुदीना ,नीबू ,तरबूज आदि का सेवन
अधिक करना चाहिये
शीतल पानी का सेवन ,2 से 3 लीटर रोजाना
अगर आप योग के जानकार हैं ,तो सीत्कारी ,शीतली
तथा चन्द्र भेदन प्राणायाम एवं शवासन का अभ्यास
कीजिये ये शारीर में शीतलता का संचार करते है

-जुकाम के इलाज में हल्दी काफी फायदेमंद है। बहती नाक के इलाज
के लिए हल्दी को जलाकर इसका धुआँ लें, इससे नाक से पानी
बहना तेज हो जाएगा व तत्काल आराम मिलेगा।
यदि नाक बंद है तो दालचीनी, कालीमिर्च, इलायची और जीरे के
बीजों को बराबर मात्रा में लेकर एक सूती कपड़े में बाँध लें और इन्हें
सूँघें जिससे छींक आएगी। 10 ग्राम गेहूँ की भूसी, पाँच लौंग और
कुछ नमक लेकर पानी में मिलाकर इसे उबाल लें और काढ़ा बनाएँ।
एक कप काढ़ा पीने से लाभ मिलेगा।

लगभग 2 किलोग्राम वजन आसानी से कम कर सकते हैं। इसके लिए
आपको कोई अतिरिक्त मेहनत भी नहीं करनी होगी।
यदि आप नियमित रूप से ग्रीन कॉफी यानी हरी काफी का
सेवन करते हैं तो ग्रीन कॉफी में मौजूद क्लोरोजेनिक एसिड
आपकी आहार नली में शुगर की मात्रा को कम कर देता है। इसके
साथ ही ग्रीन कॉफी से आपके फैट के खत्म होने के प्रक्रिया
एकदम तेज हो जाती है।
दिमाग को तेज करता है- इस ग्रीन कॉफी को पीने से आपका मूड
तो अच्छा हो ही जाता है लेकिन ये आपके दिमाग को भी तेज
करता है। ये आपके दिमाग की गतिविधियों, प्रतिक्रिया,
याददाश्त, सतर्कता को तेज करता है।
एंटी एजिंग- आजकल ऐसा कौन है जो जवां दिखना नहीं चाहता
है, हर कोई अपनी बढ़ती उम्र को रोकना चाहता है। ग्रीन कॉफी
इस मामले में काफी मददगार है, जी हां ये उम्र बढ़ने की प्रक्रिया
को धीमा कर देती है।

आँख -आंखो में प्रतिदिन गुलाबजल डालने से आंखों के कई प्रकार के रोग
ठीक हो जाते हैं।सुबह के समय में जल्दी उठना चाहिए तथा हरी घास पर नंगे पैर कुछ
दूर तक चलना चाहिए। रोजाना ऐसा करने से आंखों की रोशनी
तेज होती है।
आंखो में यदि किसी प्रकार का रोग हो जाता है तो सबसे पहले
रोगी व्यक्ति को आंखो में रोग होने के कारणों को दूर करना
चाहिए।
आंखोके रोग से पीड़ित रोगी को रोग की स्थिति के अनुसार एक
से तीन दिनों तक फलों के रस (नारियल पानी, अनन्नास, संतरे,
गाजर) का सेवन करके उपवास रखना चाहिए।
आंखो के रोग से पीड़ित रोगी को उत्तेजक खाद्य पदार्थों जैसे-
चाय, कॉफी, चीनी, मिर्च-मसालों का उपयोग बंद कर देना
चाहिए।
आंखो के रोग से पीड़ित रोगी को विटामिन `ए´, `बी´ तथा `सी
´ युक्त पदार्थो जैसे -हरी सब्जियों वाले भोजन का  अधिक सेवन करना चाहिए क्योंकि
इन विटामिनों की कमी के कारण आंखों में कई प्रकार के रोग हो
जाते हैं।
आंखों को प्रतिदिन दो बार पानी से धोना चाहिए। आंखों को
धोने के लिए सबसे पहले एक मोटा तौलिया लेना चाहिए। इसके
बाद चेहरे को दो मिनट के लिए आंखें बंद करके रगड़ना चाहिए।
फिर आंखों पर पानी मारकर आंखों को धोना चाहिए। इसके बाद
साफ तौलिए से आंखों को पोंछना चाहिए। एक दिन में कम से कम
6 से 7 घण्टे की नींद लेनी चाहिए। इससे आंखों की देखने की
शक्ति पर कम दबाव पड़ता है। इसके फलस्वरूप आंखों में किसी
प्रकार के रोग नहीं होते हैं और यदि आंखों में किसी प्रकार के
रोग होते भी हैं तो वे ठीक हो जाते हैं।

सब्जियो से ईलाज -गाजर -।गाजर के रस में केंसर विरोधी तत्व
पाये जाते हैं। अनुसंधान में पाया गया है कि गाजर में केंसर को
ठीक करने के गुण विद्ध्यमान हैं। यह फ़ेफ़डे,स्तन और बडी आंत के
केंसर  से बचाव करता है।चर्म विकृतियों में भी गाजर का उपयोग
लाभप्रद रहता है।गाजर  हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक
क्षमता को बढाता है। इसे टोनिक के रूप में व्यवहार करना
चाहिये। यह नेत्रों के लिये बेहद फ़ायदेमंद है।बुढापे में आने वाले
मोतियाबिंद की रोकथाम करता है।
-करेला -मधुमेह के
रोगियों के लिए ‘अमृत’ तुल्य है। 100 मिली. के रस में इतना ही
पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है और प्रात:
चार किलोमीटर टहलना चाहिए तथा मिठाई खाने से परहेज
रखना चाहिए।
– लौकी -हमारे शरीर के कई रोगों
को दूर करने में सहायक होती है।
-टमाटर -टमाटर स्वादिष्ट होने के साथ पाचक भी होता है। पेट के रोगों में
इसका प्रयोग औषधि की तरह किया जा सकता है। जी
मिचलाना, डकारें आना, पेट फूलना, मुँह के छाले, मसूढ़ों के दर्द में
टमाटर का सूप अदरक और काला नमक डालकर लिया जाए तो
तुरंत फायदा होता है।
-प्याज सूजन विरोधी गुण रखता
है,संक्रमण  में    एन्टिबायोटिक  के  रूप मे काम करता है। प्याज में
केंसर से लडने की की क्षमता है।
-कद्दू का रस भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह
मूत्रवर्धक होता है और पेट संबंधी गड़बड़ियों में भी लाभकारी
रहताहै। यह खून में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में
सहायक होता है और अग्नयाशय को भी सक्रिय करता है। इसी
वजह से चिकित्सक मधुमेह के रोगियों को कद्दू के सेवन की सलाह
देते हैं।
और सारी ही सब्जियो के गुण है । सभी सब्जी फायदेमंद है ।docter के पास जाने से अच्छा है कि सब्जी खाए ।

फल भी फायदेमंद -सेवफ़ल में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व पाये जाते हैं।
इसमें खनिज तत्व और विटामिन अधिक मात्रा में मौजूद रहते है।
सेवफ़ल में उपस्थित लोह तत्व से शरीर में नया खून बनने में मदद
मिलती है।
गुर्दे की पथरी वाले रोगियों को नियमित रूप से सेवफ़ल इस्तेमाल
करने की सलाह दी जाती है।
सेवफ़ल में कब्ज तोडने की अद्भुत शक्ति है। कच्चे सेवफ़ल के नियमित
उपयोग से कब्ज का स्थाई ईलाज हो जाता है।
उबले सेवफ़ल खाने से बच्चों के अतिसार(दस्त लगने) में लाभ होता है।

पारंपरिक रूप से चुकंदर शरीर में नया खून बनाने वाले फ़ल के रूप में
जाना जाता है।
चुकंदर लिवर,पित्ताषय,तिल्ली, और गुर्दे के विकारों को
लाभप्रद पाया गया है। इन अंगों के दूषित तत्वों को बाहर
निकालने की शक्ति चुकंदर में पाई गई है।
चुकंदर में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
केल्शियम,फ़ास्फ़ोरस और लोह तत्व भी खूब होता है।इसमें पाये
जाने वाले आयरन से कब्ज नहीं होती है।

-सब्जी के तौर पर इस्तेमाल किये जाने वाले कटहल से अचार और
पापड भी बनाये जाते हैं। कटहल की पत्तियों की राख में अल्सर
को ठीक करने के गुण होते हैं। पके हुए कटहल का गूदा निकालकर
भली प्रकार  मेश करें,फ़िर उबालकर ठंडा करें,यह मिश्रण पीना
जबर्दस्त स्फ़ूर्तिदायक होता है। यह मिश्रण शरीर में टानिक का
काम करता है। कटहल के छिलकों से निकलने वाले दूध को
गांठनुमा सूजन अथवा कटे-फ़टे  चमडे ,घाव पर लगावें तो लाभ
होता है।
कटहल की कोंपलों को कूटकर गोली बनालें। इनको चूसने से
स्वर भंग और गले के रोगों में फ़ायदा होता है।

-इसमें सोडियम की
मात्रा कम और पोटेशियम ज्यादा होने से उच्च रक्तचाप में
लाभप्रद फ़ल है। हाई ब्लड प्रेशर की जटिलताओं को भी
नियंत्रित करता है। केले में पाया जाने वाला रेशा भी इसमें
सहायता करता है। केले  में उपस्थित पोटेशियम के प्रभाव से गुर्दों
के जरिये केल्शियम की कम हानि होती है और इस प्रकार केला
अस्थिक्षरण रोग में लाभ देता है। अतिसार रोग मे केला अत्यंत
हितकारी है। इससे ईलेक्ट्रोलाईट्स की पूर्ति होती है और पौषक
तत्वों का शरीर में संचय होता है। केले में अम्लता विरोधी तत्वों
की मौजूदगी से पेप्टिक अल्सर के रोगियों को केला खाने की
सलाह दी जा सकती है।केले में उपस्थित पेक्टीन से आंतों की
कार्यकुशलता बढती है और कब्ज रोग में फ़ायदा होता है। कच्चा
केला शूगर रोगियों के लिये बेहद लाभ प्रद है। केले के अंदर
केरोटोनाईड होता है,इससे विटामिन ए की पूर्ति होती है और
रात्री अंधत्व रोग में इस्तेमाल करना प्रयोजनीय है। पर्यात
मात्रा में केले का सेवन करते रहने से किडनी के  केंसर से बचाव हो
सकता है लेकिन प्रोसेस्ड  जूस ज्यादा उपयोग करने से किडनी के
केंसर की संभावना बढ जाती है।
– यह फ़ल शरीर के किसी
भाग में आई सूजन में लाभकारी है और पीडानाशक भी है। इसमें
विटामिन सी का भंडार है। पाईनेपल चोंट,खरोंच,मोच,मांसपेशी
खिंचने,शौथ में हितकारी फ़ल माना गया है।इसके सूजन विरोधी
गुण से संधिवात और गठिया रोगी लाभान्वित हो सकते हैं। शल्य
क्रिया के बाद की सूजन ठीक करने में भी इसका व्यवहार होना
उचित है। ब्रोमैलेन प्रोटीन पचाने में भी सहयोगी रहता है।यहां यह
भी बताना उचित होगा कि एन्जाईम्स ताप से नष्ट हो जाते हैं
,इसलिये पाईनेपल या जूस को ऊबालना हानिकारक है|
-जामुन की गुठली चिकित्सा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी
मानी गई है। इसकी गुठली के अंदर की गिरी में ‘जंबोलीन’ नामक
ग्लूकोसाइट पाया जाता है। यह स्टार्च को शर्करा में परिवर्तित
होने से रोकता है। इसी से मधुमेह के नियंत्रण में सहायता मिलती है।जामुन के कच्चे फलों का सिरका बनाकर पीने से पेट के रोग ठीक
होते हैं। अगर भूख कम लगती हो और कब्ज की शिकायत रहती हो
तो इस सिरके को ताजे पानी के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर
सुबह और रात्रि, सोते वक्त एक हफ्ते तक नियमित रूप से सेवन करने
से कब्ज दूर होती है और भूख बढ़ती है।
– व्यक्ति को जितनी
विटामिन ‘सी’ की आवश्यकता होती है, वह एक संतरें को
प्रतिदिन खाते रहने से पूरी हो जाती है। संतरे के सेवन से शरीर
स्वस्थ रहता है, चुस्ती-फुर्ती बढ़ती है, त्वचा में निखार आता है
तथा सौंदर्य में वृद्धि होती है।  संतरे में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी, लोहा और पोटेशियम
काफी होता है। संतरे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें
विद्यमान फ्रुक्टोज, डेक्स्ट्रोज, खनिज एवं विटामिन, शरीर में
पहुंचते ही ऊर्जा देना प्रारंभ कर देते हैं।
संतरे का एक गिलास रस तन-मन को शीतलता प्रदान कर थकान
एवं तनाव दूर करता है, हृदय तथा मस्तिष्क को नई शक्ति व ताजगी
से भर देता है।पेट में गैस, अपच, जोड़ों का दर्द, उच्च रक्तचाप, गठिया, बेरी-
बेरी रोग में भी संतरे का सेवन बहुत कुछ लाभकारी होता है।
-शहद के साथ पके आम के सेवन से क्षयरोग एवं प्लीहा के रोगों में
लाभ होता है तथा वायु और कफ दोष दूर होते हैं।
. यूनानी चिकित्सकों के अनुसार, पका आम आलस्य को दूर
करता है तथा मूत्र संबंधी रोगों का सफाया करता है।
प्राकृतिक रूप से पका हुआ आम क्षयरोग यानी टीबी को
मिटाता है, गुर्दे एवं बस्ति (मूत्राशय) खोई हुई शक्तियों को
लौटाता है।

आम का रस भारी- ताकत बढ़ाने वाला, वात को हरने
वाला, दस्त लाने वाला, प्यास को कम करने वाला और
शरीर में कफ की मात्रा को बढ़ाने वाला होता है। अगर आम
के रस को निकालकर उसमे बराबर मात्रा में दूध और सफेद बूरा
या इच्छानुसार मिश्री मिलाकर कपड़े में छानकर इस्तेमाल
किया जाए तो ये बहुत ही स्वादिष्ट आम का रस बन जाता
है।
भूखे पेट आम न खाएँ। इसके अधिक सेवन से रक्त विकार, कब्ज और पेट
में गैस बनती है। कच्चा आम अधिक खाने से गला दर्द, अपच, पेट दर्द
हो सकता है। कच्चा आम खाने के तुरंत बाद पानी न पिएँ।

-पपीते में उच्च मात्रा में पोटेशियम तत्व पाया जाता है और इसके
गूदे में भरपूर विटामिन” ए ” मिलता है। पपीता के बीज और
पत्तियां अपने कीटाणुनाशक गुणों के चलते आंतों में निवास करने
वाले किटाणुओं को मारने के लिये प्रयोग किये जा सकते हैं।इसके
नियमित उपयोग से कब्ज  रोग का ईलाज हो जाता है।इसमें पाये
जाने वाले पापैन(प्रोटीन) का हमारे शरीर के पाचन संस्थान को
चुस्त-दुरस्त रखने का उत्तरदायित्व है। पपीते का जूस नियमित
पीने से बडी आंत की सफ़ाई होती है और उसमें स्थित
संक्रमण,श्लेष्मा और पीप  का निष्कासन होने लगता है। ऐसे घाव
जो अन्य चिकित्सा से ठीक न हो रहे हों पपीता का छिलका
उन घावों पर कुछ रोज लगाकर अच्छे परिणाम की उम्मीद रखना
चाहिये। पपीता में सूजन विरोधी और केंसर से बचाने के गुण मौजूद
हैं।इस सूजन विनाशक गुण के चलते पपीता उन लोगों के लिये
फ़ायदेमंद है जो शौथ,संधिवात ,गठिया रोग से पीडित है।

अंगूर हृदय रोगों में उपकारी है। जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक
का दौरा पड चुका हो उसे कुछ दिनों तक केवल अंगूर के रस के
आहार पर रखने के अच्छे परिणाम आते हैं।इसका उपयोग हृदय की
बढी हुई धडकन को नियंत्रित करने में सफ़लतापूर्वक किया जा
सकता है।

-आलूबुखारा एक स्वास्थ्यवर्धक फल है। इसके सेवन
से हाई ब्लड़ प्रेशर, स्ट्रोक आदि का खतरा कम हो जाता है और
शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है। आलूबुखारे में कई तरह के
विटामिन और मिनरल पाएं जाने के कारण यह हमारे शरीर के
आवश्यक विटामिन और मिनरल की पूर्ति करता है।
आलूबुखारा में कार्बोहाइड्रेट की अधिक तथा कैलोरी और फैट
की मात्रा बहुत कम होती है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व, मिनरल
और विटामिन पाये जाते है। आलूबुखारा विटामिन ए, के, सी
कैल्शियम, मैग्नीशियम, फोस्फोरस, कॉपर, आयरन, पोटेशियम और
फाइबर का बहुत अच्छा स्त्रोत है।
आलूबुखारा में भरपूर मात्रा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की
रोग प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ता है और शरीर को कई तरह की
बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। इस फल में नियासिन,
राइबोफ्लेविन और थायमिन जैसे तत्व भी पाये जाते हैं। इसके सेवन
से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं।

-सीताफल न केवल एक अच्छा फल है बल्कि अपनी
बहुत सारी खूबियों के साथ यह हमारी सेहत के
लिए कमाल का होता है क्योंकि जानकर यह
मानते है तो शरीर की कमजोरी के लिए दूर करने के
लिए सीताफल एक बेहतर विकल्प हो सकता है और
साथ ही यह आपकी रोग प्रतिरोधक शक्ति को
भी बढाता है ।

योगा-योग के
जरिए न सिर्फ बीमारियों का निदान किया जाता है,
बल्कि इसे अपनाकर कई शारीरिक और मानसिक तकलीफों
को भी दूर किया जा सकता है। योग प्रतिरक्षा प्रणाली
को मजबूत बनाकर जीवन में नव-ऊर्जा का संचार करता है।
योगा शरीर को शक्तिशाली एवं लचीला बनाए रखता है
साथ ही तनाव से भी छुटकारा दिलाता है जो रोजमर्रा
की जि़न्दगी के लिए आवश्यक है। योग आसन और मुद्राएं तन
और मन दोनों को क्रियाशील बनाए रखती है

 बर्फ – : चोट लगने पर खून अगर ज्यादा बहे तो बर्फ मले
खून तुरंत जमकर रुक जायेगा।- नाक के रोग –
नकसीर : सिर और नाक पर बर्फ रखने से नकसीर (नाक से खून बहना)
तुरंत बंद हो जाती है।
– घमौरियां होने पर :
शरीर पर बर्फ को मलने से घमौरियां सूख जाती हैं।

गन्ने का रस बहुत ही सेहतमंद और गुणकारी पेय है. इसमें कैल्शियम,
पोटैशियम, आयरन, मैग्नेशियम और फॉस्फोरस जैसे आवश्यक पोषक
तत्व पाए जाते हैं. इनसे हड्डियां मजबूत बनती हैं और दांतों की
समस्या भी कम होती है. गन्ने के रस के ये पोषक तत्व शरीर में खून के
बहाव को भी सही रखते हैं.
वहीं इस रस में कैंसर व मधुमेह जैसी जानलेवा बीमारियों से लड़ने की
ताकत भी होती है.|
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा गन्ना उगाने वाला देश है ।गर्मी के
मौसम मे गन्ने के रस से ज्यादा कुछ पोषक और स्वस्थ रखने वाला
कोई और रस नहीं हो सकता ।

काली मिर्च -आयुर्वेद में काली मिर्च को सभी प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस
आदि का नाश करने वाली औषधि माना जाता है।खांसी में काली मिर्च को गर्म दूध में मिलाकर सेवन करना
फायदेमंद है।*सर्दी, जुकाम-खांसी होने पर 8-10 काली मिर्च, 10-15 तुलसी
के पत्ते मिलाकर चाय बनाकर पीने से आराम मिलता है।

गला -सोते समय एक ग्राम मुलहठी की छोटी सी गांठ मुख में
रखकर कुछ देर चबाते रहे। फिर मुंह में रखकर सो जाए। सुबह तक
गला साफ हो जायेगा। मुलहठी चूर्ण को पान के पत्ते में
रखकर लिया जाय तो और भी अच्छा रहेगा। इससे सुबह गला
खुलने के साथ-साथ गले का दर्द और सूजन भी दूर होती है।

-वजन बढ़ाने और वजन घटाने के लिए भी शहद लाभकारी है। आप
यदि गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लेंगे
तो कुछ ही समय में आप अपना वजन कम होते हुए देख सकते हैं।
आर्थराइटिस के दर्द से निजात पानी हो या फिर जोड़ों में
अधिक दर्द हो तो शहद में दालचीनी का पाउडर मिलाकर मसाज
करनी चाहिए।
जुकाम दूर करने के लिए शहद, अदरक और तुलसी के पतों का रस
बराबर मात्रा में मिलाकर चाटने से राहत मिलती है।

-एक नींबू के रस में तीन चम्मच शकर, दो चम्मच पानी मिलाकर,
घोलकर बालों की जड़ों में लगाकर एक घंटे बाद अच्छे से सिर धोने
से रूसी दूर हो जाती है व बाल गिरना बंद हो जाते हैं।
एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर सेंधा नमक मिलाकर
सुबह-शाम दो बार नित्य एक महीना पीने से पथरी पिघलकर
निकल जाती है।

दमा -अधिक गरम पानी में २ चम्मच शहद मिलाकर   थौडा थौडा
पीते हुए उपयोग करें। रात को सोते वक्त यह उपचार लेने से श्वास
रोग में जबर्दस्त फ़ायदा होता है।

ज्वर -संतरा ज्वर रोगी के लिये अमृत समान है। इससे पेशाब खुलकर
होता है। संतरा रोगी को तुरंत शक्ति देता है। संतरे के उपयोग से
रोग प्रतिरोधक शक्ति उन्नत होती है। संतरा ज्वर रोगी के
पाचन तन्त्र को सुधारता है।

बवासीर -10 से 12 ग्राम धुले हुए काले तिल ताजा मक्खन के साथ लेने से भी
बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।

उल्टी-तुलसी के पत्ते के रस में बराबर की मात्रा में शहद मिलाकर चाटने
से उल्टी होना बंद हो जाता है|

बाल- प्रतिदिन घी से सिर की मालिश करके भी बालों के सफेद होने
की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

घुटनों का दर्द -गरम तेल से हल्की मालिश करना घुटनों के दर्द में बेहद उपयोगी
है| एक बड़ा चम्मच सरसों के तेल में लहसुन की २ कुली पीसकर डाल
दें | इसे गरम करें कि लहसुन भली प्रकार पक जाए|  आच से उतारकर
मामूली गरम हालत में इस तेल से घुटनों या जोड़ों की मालिश
करने से दर्द में तुरंत राहत मिल जाती है|

पीलिया -टमाटर का रस पीलिया में लाभकारी है। रस में थौडा नमक और
काली मिर्च मिलाकर पीयें। स्वास्थ्य सुधरने पर एक दो
किलोमीटर घूमने जाएं और  कुछ समय धूप में रहें।  अब भोजन  ऐसा
होना चाहिये जिसमें पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन सी
,विटामिन ई और विटामिन बी काम्पलेक्स मौजूद हों। पूरी तरह
स्वस्थ होने के बाद भी भोजन के मामले में लापरवाही न बरतें।और उपवास भी रखे
पानी -पानी शरीर को स्वस्थ और फिट रखता है, जल पूरी शरीर को
अच्छा  और ऊर्जावान बनता है यह एक कुदरती पदार्थ है। हमारी
जिंदगी पानी पर ही निर्भर है। जिस तरह एक कार को गैस,
पेट्रोल या डीजल की जरूरत होती है, वैसे ही हमें पानी की जरूरत
होती है। हमारे शरीर के सभी सेल्स और ऑर्गन्स को अपना
कामकाज तरीके से करने के लिए पानी की जरूरत है।
गर्मी में शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनी रहे, इस का
ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है। त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के
लिए गर्मी के महीनों में खूब पानी पीएं।

केल्शियम -दूध केल्सियम की आपूर्ति के लिये श्रेष्ठ
है। इससे हड्डिया ताकतवर बनती हैं। गाय या बकरी का दूध भी
लाभकारी है।
विटामिन डी की प्राप्ति सुबह के समय धूपमें बैठने से हो सकती है।
विटामिन ’डी” शरीर में केल्सियम संश्लेशित करने में सहायक
होता है।

पेट दर्द -सूखा अदरक मुहं मे चूसने से पेट दर्द में राहत मिलती है।

जरूरी बाते – टहलने के अलावा, दौडऩा, साइकिल चलाना, घुड़सवारी, तैरना
या कोई भी खेलकूद, व्यायाम के अच्छे उपाय हैं। स्त्रियां चक्की
पीसना,,रस्सीकूदना, पानी भरना, झाड़ू- पोछा लगाना आदि
घर के कामों में भी अच्छा व्यायाम कर सकती हैं। रोज थोड़े समय
छोटे बच्चों के साथ खेलना, 10- 15 मिनट .।वह सभी भी हमेशा स्वस्थ रखने मे मदद करता है । हमे वह रोज करना चाहिए ।जुकाम,सर्दी,खांसी ,बुखार में गर्म पानी पीएं|
24घंटे में कम से कम १० गिलास पानी पीएं
पीने के लिए फ्रीज के पानी का सीधे उपयोग न करें
भोजन आधा पेट करें,पानी चौथाई पेट पीएं बाकी हिस्सा
पेट खाली रखें|
रात को दस बजे तक सो जाना चाहिए|  ज्यादा रात
जागना हानि कारक है|गुटखा ड्रग्स,बीडी,सिगरेट ,तम्बाखू और मांसाहार से परहेज
करें|किसी तरह का नशा नही करना चाहिए ।

हमे बिमारी से ड़रना नही चाहिए ।बल्कि उसका सामना करना चाहिए और उसका ईलाज खोजना चाहिए । इससे बताऐ गए सभी उपाय को ड़ाकटर की सलाह से करे क्योंकि कि बिमारी कुछ और होती है और आप का इलाज कुछ और आप स्वस्थ रहे इसलिए आपको वह ईलाज बताते है ।अगर आप स्वस्थ है तो इस तरह खाये पीये कि आप कई बिमारी हो इसके साथ आप व्यायाम करे और स्वस्थ रहे ।धन्यवाद ।

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