Connect with us

Yoga Karne Ke Fayde Hindi Me Poori Jankari

Health Care

Yoga Karne Ke Fayde Hindi Me Poori Jankari

सभी को बिमारी तो होती लेकिन बिमारी ज्यादातर चिंता से होती है और बढ़ती भी चिंता से ही है । Yoga एक ऐसा तरीका है जो कि चिंता और बिमारी दोनो दूर करता है । हमारे ऋषि मुनियों ने योग के द्वारा शरीर मन और प्राण की शुद्धि तथा परमात्मा की प्राप्ति के लिए आठ प्रकार के
साधन बताएँ हैं, जिसे अष्टांग योग कहते हैं

1. यम
2. नियम
3. आसन
4. प्राणायाम
5. प्रात्याहार
6. धारणा
7. ध्यान
8. समाधि

Exercise Kaise Kare Exercise Karne Ke Fayde Hindi Me

पीठ दर्द -योगासन  प्रतिदिन सवेरे सूर्य नमस्कार का अभ्यास करें। कपालभाति और भस्त्रिका के साथ ही अनुलोम-विलोम करें। खड़े होकर किए जाने वाले योगासनों में त्रिकोणासन, कटिचक्रासन, ताड़ासन, अर्धचंद्रासन और पादपश्चिमोत्तनासन करें।वह सबसे जो भी कर सके करो उससे पीठ दर्द दूर हो जाता है ।

नींद का न आना -हालासन हलासन करते समय हमारे शरीर की मुद्रा, जमीन जोतने के लिए उपयोग में किये जाने वाले उपकरण ‘हल’ के समान हो जाती है| इसलिए ही इस आसान को हलासन कहा गया है| इंग्लिश में इसे प्लो पोज़ कहा जाता है| शरीर को लचीला बनाने और वजन को कम करने के लिए यह एक उत्तम आसान है| हालासन योगासन को करते समय सीधे सोकर अपनी टांगो को धीरे-धीरे ऊपर उठाना होता है| फिर अपनी टांगो को सिर के उपर से ले जाकर पीछे जमीन पर टच करवाते हैं| इसे करते वक्त मांसपेशियों में खिचाव आता है और नींद भी अच्छी आती है।

Diabetes ke lakshan Aur Upay hindi me

आसन के लाभ -नुकसान

1-सर्वांगासन करने की विधि -सर्वांगासन करने के लिए सर्वप्रथम किसी साफ समतल जगह का चुनाव कर उस पर चटाई बिछाएं।
– इसके पश्चात चटाई पर पीठ के बल लेट जाए|
-अपने दोनों पैरों को एक साथ मिला कर रखे|
-दोनों हाथो को कमर से सटाकर जमीन पर रखे और शरीर को ढीला छोड़ दे|
-अब सांस अंदर भरते हुए धीरे धीरे से पैरों को बिना मोड़े उपर की और उठाएं।
-जैसे जैसे आप पैरो को उपर की तरफ उठाएं, वैसे-वैसे कमर को भी उपर की तरफ उठाना
है|
-आपको अपने पैरों और पीठ को 90 डिग्री तक उठाने की कोशिश करना है|
-हथेलियों को भूमि पर रखते हुए पीठ और कमर को उपर की तरफ उठाएं।
-इस आसन का अभ्यास करते समय आपका मुख उपर आकाश की तरफ होना चाहिए। और कुहनियां जमीन से टिकी हुई हों।
-जब आप इस आसन को करते है उस वक्त हाथों से पीठ को सहारा दे|
-30 सेकेण्ड या उससे अधिक इस मुद्रा को बनाये रखने की कोशिश करे|
– अब पुनः पहले की अवस्था में आएं।
-सर्वांगासन को अपने शरीर की क्षमता के अुनसार ही करें।

लाभ -इस आसन का अभ्यास कई बीमारियों जैसे उच्च रक्तचाप , जलन, गुस्सा इत्यादि को कम करने में लाभदायक है। यह आपको कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है, इससे आपका पाचन तंत्र दुरुस्त होता है आदि| जो लोग नियमित इस आसन को करते है उनके चयापचय कार्य नियमित होते है, जिससे वजन को घटाने में मदद मिलती है| रक्त से विषाक्त पदार्थों और अन्य अपशिष्ट उत्पादों को हटाने में मददगार है| इसलिए इससे त्वचा संबंधित बीमारिया नहीं होती| सर्वांगासन का अभ्यास आपके मस्तिक्ष में रक्त की पूर्ति करता है, इसलिए इससे बालों के झड़ने, बाल गिरने और बालों का समय से पहले सफ़ेद होने की समस्या खत्म हो जाती है|

-नुकसान -अपनी क्षमता के अनुसार ही करे| इसके अतिरिक्त जिन लोगों को गर्दन या रीढ़ में ‍शिकायत हो उन्हें सर्वांगासन को नहीं करना चाहिए।

Dengue Aur Chikungunya kya hai ? Dengue aur Chikungunya ke baare me Poori jankari

2-प्राणायाम -प्राणायाम अपने श्वास की वृद्धि एवं नियंत्रण है। श्वास लेने की सही तकनीक का अभ्यास करने से रक्त एवं दिमाग में ऑक्सीजन
की मात्रा बढ़ाई जा सकती है , अंततः इससे प्राण या महत्त्वपूर्ण जीवन ऊर्जा के नियंत्रण में मदत मिलती है। प्राणायाम आसानी से योग आसन के साथ किया जा सकता है। इन दो योग सिद्धांतों का मिलन  मन एवं शरीर का उच्चतम शुद्धिकरण एवं आत्मानुशासन माना  गया है। प्राणायाम की तकनीक हमारे ध्यान के अनुभव को भी गहरा बनाती है।

3-स्वस्तिकासन  स्थिति:- स्वच्छ कम्बल या कपडे पर पैर फैलाकर बैठें। विधि:- बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाहिने जंघा और पिंडली और के बीच इस प्रकार स्थापित करें की बाएं पैर का तल छिप जाये उसके बाद दाहिने पैर के पंजे और तल को बाएं पैर के नीचे से जांघ और पिंडली के मध्य स्थापित करने से स्वस्तिकासन बन जाता है। ध्यान मुद्रा में बैठें तथा रीढ़ सीधी कर श्वास खींचकर यथाशक्ति रोकें।इसी प्रक्रिया को पैर बदलकर भी करें।
लाभ:- पैरों का दर्द, पसीना आना दूर होता है। पैरों का गर्म या ठंडापन दूर होता है. बढ़िया आसन है।

Gharelu Nuskhe Hindi Me – घरेलू नुस्खे हिंदी में

4-अर्द्धमत्स्येन्द्रासन /Ardha Matsyendrasana
विधि:- दोनों पैर साम बैठें. बाएं पैर को मोड़कर एडी को नितम्ब के पास लगाएं। बाएं पैर को घुटने के पास बाहर की ओ़र भूमि पर रखें। बाएं हाथ को दायें घुटने समीप बाहर की ओ़र सीधा रखते हुए दायें पैर के पंजे को पकडें। दायें हाथ को पीठ के पीछे से घुमाकर पीछे की देखें।
इसी प्रकार दूसरी ओ़र से इस आसन को करें।

लाभ:-
मधुमेह एवं कमरदर्द में लाभकारी। पेट के विकार दूर होते है आंखे बलवान होती है

5-चक्करासन—
यह आसन करने से हमारे शरीर की नाड़ी और ग्रंथियों को लाभ मिलता है. यह आसन स्त्रियों के प्रजनन से सम्बंधित कई प्रकार के रोगों को जड़ से ख़त्म कर देता है. इस आसन को करने से हमारे सारे शरीर को लाभ मिलता है. यह आसन पीठ और पेट के सभी अंगों के लिए
लाभदायक है. इस आसन को करने से हमारी कमर में लचीलापन आता है. यह आसन मांस पेशियों को ताकतवर बनाता है.

Lehsun ke Fayde – लहसुन के फायदे

6-वीरभद्रासन –
– चटाई पर दोनों पैर साथ रखकर और हाथों को अपने बगल में रखकर खड़े हो जाएं। अब अपने दाएं पैर को आगे की और बढ़ाये और बाएँ पैर को पीछे की तरफ। अब आराम से अपने दाएं घुटने को मोड़ें ताकि आप धक्का मारने वाली मुद्रा में आ सकें। अपने धड़ को मुड़े हुए दाएं
पैर की ओर ट्विस्ट करें। अपने बाएँ पैर को बदल की ओर थोड़ा सा मोड़ें ताकि आपको अतिरिक्त सपोर्ट मिले। सांस छोड़ें, अपनी बाँहें सीधी करें और शरीर को मुड़े हुए घुटने से ऊपर की ओर उठाएं। अपनी बांहों को ऊपर स्ट्रेच करें और धड़ को धीरे से पीछे की और झुकाएं ताकि आपकी पीठ धनुष का आकार ले सके। इस मुद्रा में तब तक रहें जब तक आप इसके साथ सहज हैं। सामान्य गति से सांस लें। इस आसन से बाहर आने के लिए सांस छोड़ें और अपने दाएं घुटने को सीधा करें। अब अपने दाएं पैर को मूल स्थिति में ले आएं। अपने हाथों की मदद से पूर्ववत स्थिति में आएं। जल्दबाजी न करें अन्यथा आपकी पीठ या पैर चोटिल हो सकते हैं। इसी आसन को दूसरे पैर के लिए दोहराएं। इसका शाब्दिक अर्थ है योद्धाओं वाली मुद्रा, यह आसन आपकी पीठ को स्ट्रेच करता है और आपकी जंघाओं पुष्टिका और पेट को मज़बूत करता है। यह आपकी एकाग्रता को बढ़ाता है और आपकी छाती  को फैलाता है। यह शरीर की अवांछित चर्बी को कम करता है।

Shahad Ke Fayde – शहद के फायदे

7-सुप्त पवनमुक्तासन –
– चटाई पर सीधे लेटकर बाएँ पैर का घुटना मोड़कर ऊपर की ओर उठाते हुए साँस निकालते हुए उदर पर रखें तत्पश्चात दोनों कूहानियाँ मोड़कर हाथों की उँगलियों को आपस में फँसाते हुए घुटने से नीचे इस तरह पकड़ें कि घुटने का दबाव उदर पर पड़े। उपयुर्क्त स्थिति में सिर को धीरे धीरे ऊपर उठाते हुए नाक या ठोड़ी को घुटने से स्पर्श करने का प्रयास करें। साँस को रोकें। दायें पैर से इसी प्रक्रिया को दोहराएँ । रोकें, इसके पश्चात पैरों को नीचे स्वभाविक स्थिति में लाकर दोनों पैरों को एक साथ मोड़ कर सिर को धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाते हुए नाक या ठोड़ी को घुटने से स्पर्श करने का प्रयास करें । रोकें । तीन-बार इस आसन का अभ्यास करें ।

8-पश्चिमोत्तानासन-
– चटाई पर दोनों पैर सामने फैला कर बैठ जाएँ । दोनों हथेलियाँ
सामने की ओर रखते हुए हाथों को धीरे – धीरे कंधों में कूहनियाँ
सीधी रखते हुए ऊपर उठाएँ ।
साँस निकालते हुए दोनों हाथों के बीच में सिर रखते हुए धीरे-
धीरे कमर के ऊपर के भाग को सामने की ओर झुकते हुए हाथों से
दोनों पैरों के अंगूठे पकड़ें तथा यथासंभव माथे को घुटने से स्पर्श
करने का प्रयास करें । दोनों कूहनियाँ दोनों घुटनों के बगल में हों
। यह ध्यान रहे कि आसन की स्थिति में दोनों घुटने भूमि से लगे
रहें । तीन- चार बार में इस आसन का अभ्यास करें ।

9-नौकासन –
इस योगासन में आसन पर सीधा लेट जाए फिर दोनों पैरो को
और मस्तक उठाकर नाव की तरह शरीर को बनाएं एवं दोनों हाथ
सीधा करके पैर पंजो को स्पर्श करने की कोशिश करें। नौकासन
अवस्था में कम से कम १५ सैकण्ड रहकर शवासन  करके
विश्राम करें। यह योगासन करने से हाथ एवं पैरो की
मांसपेशियों मे लचीलापन, कमर की डिस्क आदि बिमारियों  में फायदा होता है
एवं शरीर को संतुलित बनाए रखने में सहायक है।

10-उत्कटासन सीधे खड़े हो जाएँ, दोनों पैर मिलाकर रखें। दोनों हथेलियों को प्रार्थना अर्थात नमस्कार की मुद्रा में
रखिए। पैरों के पंजे भूमि पर टिके हुए
हों तथा एड़ियों के ऊपर नितम्ब टिकाकर बैठ जाइए।
दोनों हाथ घुटनों के ऊपर तथा घुटनों को फैलाकर एड़ियों के
समानान्तर स्थिर करें। अपने धड़ को हल्का आगे मोड़ें। इस मुद्रा
में तब तक रहें जब तक आप सहज हैं। आसन से बाहर आने के लिए
आराम से सीधा खड़ा हो जाएं। कुर्सी आसन के रूप में जाने जाने
वाले इस आसन में एकाग्रता की ज़रुरत होती है और आपको उन
पेशियों पर ध्यान केन्द्रित करना होता है जो इसमें इस्तेमाल हो
रही हैं। यह ह्रदय की पेशियों, जंघाओं और पुष्टिका को मज़बूत
करता है
11-करने के लिए सर्वप्रथम एक स्वच्छ और समतल जगह का चयन करे और उसपर चटाई बिछा ले|इसके बाद पेट के बल लेटे और अपनी हथेली को कंधे के सीध में लाएं।आपके दोनों पैरो के बीच की दुरी कम करें और पैरों को सीधा एवं तना हुआ रखें। आपका माथा भी जमीन पर रखे|अब साँस लेते हुए शरीर के अगले भाग अर्थात सिर से लेकर नाभि तक ऊपर उठाये| एक बात का ख्याल रखे की कमर पर ज्यादा खिंचाव नहीं आना चाहिए| कुछ सेकंड्स इसी अवस्था मे रहे|अब गहरी स्वाँस छोडते हुए प्रारम्भिक अवस्था में आ जाये|
लाभ – पाचन तंत्र और अनिद्रा

HIV ke Lakshan in Hindi – एचआईवी होने के लक्षण

मन की शांति-
योग के संपूर्ण रूप से सांस लेने और संतुलन वाले आसनों पर
केंद्रित होने के कारण मस्तिष्क शांत रहता है। साथ ही शरीर
भी संतुलित रहता है। इसके कारण हम मस्तिष्क के दोनों
भागों से काम लेते हैं जिससे आंतरिक संचार बेहतर होता है।
योग करने से मस्तिष्क के सोचने और सृजनात्मकता वाले
हिस्सों का भी संतुलन बना रहता है।

– बेहतर रक्तसंचार
अलग अलग तरह की योग मुद्राओं और सांस लेने की क्रियाओं
के सांमजस्य के कारण योग से शरीर में बेहतर रक्तसंचार होता
है। बेहतर रक्तसंचार से शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों
को बेहतर प्रवहन होने में मदद मिलती है। जिससे त्वचा और
आंतरिक अंग स्वस्थ रहते है।

-स्वस्थ हृदय
ऐसा कोई भी योग जिसमें कुछ समय के लिए सांस रोकी
जाती है हृदय और उसकी धमनियों को स्वस्थ रखता है। योग
रक्तसंचार को बेहतर करता है जिससे रक्त एक जगह रूकता नहीं
और हृदय स्वस्थ रहता है।
– दर्द से रखे दूर
योग से शरीर का लचीलापन और एनर्जी बढ़ती है जिससे पीठ
का दर्द जोड़ों का दर्द आदि में बेहद आराम मिलता है। इससे
रीढ़ की हड्डी में दबाव और जकड़न से भी आराम मिलता है।
इतना ही नहीं गलत ढंग से बैठने या चलने के कारण होने वाले
दर्द में भी योग से आराम मिलता है।

– सांस लेने की बेहतर प्रक्रिया
योग के विभिन्न आसानों से फेफड़े और उदर भाग की क्षमता
बढ़ती है! इससे दैनिक कार्यक्षमता बढ़ती है साथ ही
सहनशक्ति में इजाफा होता है। गहरी सांस लेने में भी आराम
मिलता है जिससे विभिन्न प्रकार के भौतिक और मानसिक
तनावों से मुक्ति मिलती है।

– बना रहता है शरीर का संतुलन
ठीक ढंग से न बैठना ज्यादा ट्रैवल करना या हमेशा बाइक पर
रहना आदि के कारण शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है। योग
करने से शरीर का संतुलन बना रहता है। कई बार गिरकर चोट
लगने हड्डी के टूटने पीठ आदि संबंधित समस्याओं में दर्द के
कारण भी संतुलन बिगड़ता है।
योग से शरीर का लचीलापन बढ़ता है साथ ही दिमाग भी
तेज होता है।

– तनाव को करें कम
भाग दोड़   भरी जिंदगी में योग करने से अपार शांति मिलती
है। पूरे शरीर में रक्तसंचार बेहतर होता है जिससे मस्तिष्क
हल्का महसूस करता है और तनाव कम होता है।हमे रोज योगा करना चाहिए ।

-आसन रोग विकारों को नष्ट करते हैं,रोगों से रक्षा करते
हैं,शरीर को निरोग,स्वस्थ और बलिष्ठ बनाए रखते हैं।

-संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अपनाएं योग
अच्छा स्वास्थ्य केवल बीमारियों से दूर रहना ही नहीं है
बल्कि अपने मन और भावनाओं के बीच संतुलन को स्थापित
करना भी है। योग से न केवल बीमारियां दूर होती हैं बल्कि
योग आपको गतिशील, खुश और उत्साही भी बनाता है।

-कब्ज रोग के लिए : वज्रासन, सुप्तवज्रासन, मयूरासन,
पश्चिचमोत्तानासन, धनुरासन मत्स्यासन, कूर्मासन, चक्रासन,
योग मुद्रा और अग्रिसार क्रिया लाभदायक रहती हैं।

मधुमेह के लिए -सर्वांगासन ,बालासन,वज्रासन,हलासन धनुरासन

-पेट में गैस की समस्या होती है
उन्हें पवनमुक्तासन करना चाहिये।

-सर्दी -भस्त्रिका व अनुलोम-विलोम प्राणायाम से
श्वसन तंत्र मजबूत होता है, नाड़ियों की सफाई होती है।
नियमित रूप से इसे करने से सर्दी-जुकाम, कफ आदि की परेशानी से
निजात मिलती है। वहीं पवन मुक्तासन के जरिए शरीर के सभी
हिस्सों की हड्डियों व माँसपेशियों का संचालन होता है जिससे
उन्हें मजबूती मिलती है।

– भूख न लगना-अगर आप को भूख कम लगती हो तो धनुरासन करना चाहिए ।

माइग्रेन -माइग्रेन
माइग्रेन का मुख्य कारण दिमाग तक ब्लड़ का पर्याप्त
मात्रा में सर्कुलेशन न होता है। योगा की मदद से
दिमाग तक आसानी से ब्लड़ पहुंच जाता है। मांइड में
फ्रेशनेस बनी रहती है। माइग्रेन में सिरसासन या
हेडस्टैंड करने से लाभ मिलता है

-मत्स्येंद्रासन
मत्स्यासन
भुजंगासन
कपालभाती प्राणायाम
सभी प्रकार के रोगों से लड़ने में मदद करते है वह हमे रोज करने चाहिए ।

-पश्चिमोत्तासन स्वास्थ्य में सुधार लाता है.वह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है

-अर्ध-मत्स्येंद्रासन
भूख न लगना, वजन घटाने / बढ़ाने और कब्ज के लिए

-उदास मन, कम स्मृति, सोच और एकाग्रता, अवसादग्रस्तता
विचार के लिए योगा जरूरी है नाड़ीशुद्धि प्राणायाम करना चाहिए ।
वज्रासन (वज्र मुद्रा)
उदास मन, स्मृति, सोच और एकाग्रता, भूख न लगना, वजन घटाने /
बढ़ाने कब्ज, हाइपरसोमिया (अत्यधिक नींद) के लिए बहुत अच्छा है ।

-मार्जालासन (कैट-मुद्रा) थकान / ताकत की कमी, मनोप्रेरणा में कमी के लिए बहुत अच्छा है ।

-योग से लगभग सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज
हो सकता है। वास्तव में, अगर आप नियमित रूप से
योगाभ्यास करते है तो आपका शरीर किसी भी रोग से
मुक्त हो सकता है। और अगर आपके शरीर में कुछ
बीमारियों का विकास हो रहा है तो योगा करके
प्राकृतिक तरीके से इलाज से किया संभव है।

हमे सबको वह ध्यान से योगा करना चाहिए या किसी Yoga सिखाने वाले की मदद लेनी चाहिए। किसी की देखरेख मे करना चाहिए । Yoga करे स्वस्थ रहे । धन्यवाद

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

More in Health Care

To Top